डोमा पंचायत: गौरवशाली इतिहास से आधुनिक 'सरकार भवन' तक का सफर; जानिए 1962 से अब तक की अनसुनी कहानी
[बख्तियारपुर/पटना] मनटन शर्मा की स्पेशल रिपोर्ट
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| Panchayat Government Building Doma |
पटना जिले के बख्तियारपुर प्रखंड स्थित डोमा पंचायत इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। चर्चा की वजह है यहाँ बनकर तैयार हुआ भव्य 'पंचायत सरकार भवन'। यह भवन न केवल आधुनिक विकास की तस्वीर है, बल्कि डोमा पंचायत के 60 साल पुराने लोकतांत्रिक इतिहास का एक नया अध्याय भी है। 1962 में जब पहली बार यहाँ मुखिया का 'चयन' हुआ था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन पंचायत की अपनी इतनी भव्य 'सरकार' होगी।
मुखिया बटोरन कुमार के कार्यकाल में मिली ऐतिहासिक सौगात डोमा पंचायत के वर्तमान मुखिया श्री बटोरन कुमार (लखीपुर) के कार्यकाल को पंचायत के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए याद किया जाएगा। हाल ही में बनकर तैयार हुआ 'पंचायत सरकार भवन' उनकी दूरदर्शिता और विकास कार्यों का प्रत्यक्ष प्रमाण है। सफेद और ग्रे रंग की थीम पर बना यह भवन किसी मिनी सचिवालय से कम नहीं दिखता। भवन के निर्माण में समावेशी विकास का पूरा ध्यान रखा गया है—प्रवेश द्वार पर सीढ़ियों के साथ-साथ दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए रैम्प (Ramp) की सुविधा भी दी गई है। अब ग्रामीणों को जाति, आय, आवासीय प्रमाण पत्र या राशन कार्ड जैसी सुविधाओं के लिए ब्लॉक के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, यह सारी सुविधाएं उन्हें अपने गाँव में ही मुखिया बटोरन कुमार के नेतृत्व में इसी भवन में मिलेंगी।
इतिहास के पन्नों से: जब चुनाव नहीं, 'चयन' होता था डोमा पंचायत का अतीत बेहद रोचक है। बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि 1961 में बिहार में पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद, बख्तियारपुर प्रखंड में मुखिया का चुनाव वोटिंग से नहीं, बल्कि अधिकारियों द्वारा 'चयन' के आधार पर हुआ था।
डोमा पंचायत के प्रथम मुखिया मोहम्मद अख्तर हुसैन थे। वे मोगलपुरा विगहा के निवासी थे और उनका ससुराल रामनगर में था। उस दौर में पंचायत में डोमा, करौता, लखीपुर, रामनगर, कलरा विगहा और मुसहरी समेत कुल 6 गाँव आते थे। उस वक्त लोगों में पद को लेकर उतनी जागरूकता नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे लोकतंत्र की जड़ें गहरी होती गईं।
राजनीतिक सफर: 1962 से 2026 तक डोमा पंचायत ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। 1982 में मुखिया केदार शर्मा के निधन के बाद उपमुखिया वसंत शर्मा ने कमान संभाली। इसके बाद बिहार में (लालू-राबड़ी सरकार के दौरान) एक लंबा दौर ऐसा आया जब पंचायत चुनाव नहीं हुए। 2001 में जब नीतीश कुमार के कार्यकाल में दोबारा चुनाव शुरू हुए, तब डोमा पंचायत में लोकतंत्र फिर से जीवंत हो उठा।
डोमा पंचायत के मुखियाओं की अब तक की सूची:
मो. अख्तर हुसैन (रामनगर/मोगलपुरा) – 1962 से 1967 (प्रथम मुखिया)
रामेश्वर सिंह (करौता) – 1967 से 1977
केदार शर्मा (करौता) – 1977 से 1982 (पद पर रहते हुए निधन)
वसंत शर्मा (लखीपुर) – 1982 से (उपमुखिया से मुखिया बने)
(दीर्घकालीन अंतराल - जब चुनाव नहीं हुए)
कृष्णनंदन शर्मा (सालिमपुर) – 2001 से 2006 (चुनाव वापसी के बाद प्रथम)
अनुराधा देवी (सालिमपुर) – 2006 से 2016 (लगातार 10 वर्ष)
श्याम सुंदरी देवी (सालिमपुर) – 2016 से 2021
बटोरन कुमार (लखीपुर) – 2021 से वर्तमान
निष्कर्ष मोहम्मद अख्तर हुसैन की सादगी भरे नेतृत्व से शुरू हुआ यह कारवां आज मुखिया बटोरन कुमार के हाई-टेक 'पंचायत सरकार भवन' तक आ पहुँचा है। यह नया भवन सिर्फ ईंट-गारे का ढांचा नहीं, बल्कि डोमा पंचायत के सशक्तिकरण और बदलते बिहार की एक बुलंद तस्वीर है।

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